R&AW Report 2026 | Defense News Hindi
नई दिल्ली | 04 जनवरी 2026: भारत की बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) ने वर्ष 2026 के लिए एक बेहद संवेदनशील सुरक्षा रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अस्थिर करने के लिए पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार—ने एक ‘मल्टी-लेयर थ्रेट मैट्रिक्स’ तैयार किया है। खुफिया विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि दुश्मन देश अब सीधे युद्ध के बजाय भारत के संसाधनों को ड्रेन करने और ‘नैरेटिव वॉरफेयर’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
1. पाकिस्तान का ‘गवर्नेंस फटीग’ प्लान: कश्मीर से पंजाब तक अशांति की साजिश
खुफिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान 2026 में ‘ड्यूल अप्रोच’ पर काम करेगा:
- कश्मीर घाटी: यहां आतंकवाद (जिहाद) के जरिए भारतीय सेना की ऊर्जा और संसाधनों को उलझाए रखना।
- सीमावर्ती राज्य (पंजाब और बंगाल): नारकोटिक्स (नशा) और सांप्रदायिक नफरत फैलाकर ‘गवर्नेंस फटीग’ पैदा करना। इसका उद्देश्य भारतीय सुरक्षा बलों को आंतरिक दंगों और अपराधों को सुलझाने में थका देना है ताकि वैश्विक स्तर पर भारत के खिलाफ नकारात्मक नैरेटिव बनाया जा सके।
2. चीन: ‘थ्रेट इनेबलर’ और मैरिटाइम ब्लाइंड स्पॉट
चीन सीधे टकराव के बजाय एक ‘प्रेशर मल्टीप्लायर’ के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
- टेक्नोलॉजी और एक्सेस: चीन, पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर एक भारत-विरोधी ध्रुव (Axis) बना रहा है।
- मैरिटाइम चुनौती: हिंद महासागर में ‘रिसर्च वेसल्स’ के जरिए रणनीतिक मैपिंग करना और भारत के लिए ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ पैदा करना।
- बॉर्डर अग्रेशन: 4000 किमी की LAC पर ‘कार्टोग्राफिक अग्रेशन’ (नक्शों के जरिए घुसपैठ) जारी रखना ताकि भारतीय वायुसेना और थल सेना के संसाधन वहां ड्रेन होते रहें।
3. बांग्लादेश और म्यांमार: उत्तर-पूर्व (North-East) के लिए नया खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश अब एक ‘स्पिल ओवर थिएटर’ बन गया है, जहां अल्पसंख्यकों पर हमलों के जरिए भारत पर दबाव बनाया जा रहा है।
- म्यांमार-अमेरिका-चीन पाइपलाइन: म्यांमार में ड्रग्स, अवैध हथियार और Starlink इंटरनेट के जरिए उत्तर-पूर्व में रेडिकलाइजेशन और उग्रवाद (Insurgency) को दोबारा जीवित करने की कोशिश हो रही है।
- चुनावी दखल: असम और पश्चिम बंगाल के 2026 चुनावों के दौरान म्यांमार और बांग्लादेश से ‘क्रॉनिक प्रेशर’ बढ़ने की आशंका है।
R&AW की नई रणनीति: ‘पाइपलाइन इंटेलिजेंस’ पर फोकस
इस रिपोर्ट के बाद भारतीय खुफिया तंत्र ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है:
- इंसीडेंट टू पाइपलाइन: अब केवल आतंकी घटनाओं को रोकने के बजाय, हथियारों और ड्रग्स की पूरी ‘सप्लाई चेन’ (पाइपलाइन) को तोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा।
- अर्ली वार्निंग आर्किटेक्चर: डीप फेक, मिस-इन्फॉर्मेशन और सांप्रदायिक नैरेटिव को ‘प्री-वायलेंस इग्निशन’ के रूप में पहचान कर उसे शुरुआत में ही खत्म करना।
- नेशन-वाइड नेटवर्क: पूरे देश में एक ऐसा सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है जो किसी भी ‘असामान्य व्यवहार’ को तुरंत डिटेक्ट कर सके।
विशेष समाचार रिपोर्ट: भारत की सुरक्षा के लिए 2026 की चुनौतियाँ और सामरिक विश्लेषण
मुख्य समाचार विवरण: सुरक्षा चुनौतियों का विश्लेषण
1. पाकिस्तान का ‘ड्यूल अप्रोच’ और गवर्नेंस फटीग: विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान दो स्तरों पर भारत के विरुद्ध काम करेगा। पहली रणनीति ‘हेडलाइन लाइन’ है, जिसके तहत कश्मीर घाटी में आतंकवाद फैलाकर सेना की ऊर्जा को वहां केंद्रित रखना है।
दूसरी ओर, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में क्रिमिनल नेटवर्क और नारकोटिक्स के जरिए सांप्रदायिक तनाव पैदा कर ‘गवर्नेंस फटीग’ (शासन की थकान) पैदा करने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय खुफिया और सुरक्षा बलों के संसाधनों को आंतरिक अशांति सुलझाने में व्यर्थ करना है।
चीन: प्रेशर मल्टीप्लायर और रणनीतिक दबाव:
चीन को वर्ष 2026 के लिए ‘थ्रेट इनेबलर’ के रूप में देखा जा रहा है। चीन सीधे युद्ध के बजाय भारत पर रणनीतिक दबाव बनाएगा। वह पाकिस्तान को उन्नत तकनीक प्रदान कर और तुर्की के साथ मिलकर एक ‘मल्टीपोलर एक्सिस’ बनाने की कोशिश में है।
हिंद महासागर में मैपिंग के जरिए ‘मैरिटाइम ब्लाइंड स्पॉट’ पैदा करना और 4,000 किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर ‘कार्टोग्राफिक अग्रेशन’ के जरिए भारतीय सेना को व्यस्त रखना उसकी रणनीति का हिस्सा है।
बांग्लादेश और म्यांमार: उत्तर-पूर्व में अस्थिरता का खतरा
बांग्लादेश को ‘स्पिल ओवर थिएटर’ के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां अल्पसंख्यकों पर हमलों के जरिए दबाव बनाया जा सकता है। वहीं म्यांमार से नारकोटिक्स, अवैध हथियारों की तस्करी और एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथ फैलाने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की सीमा से लगे राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में उग्रवाद के पुनरुत्थान के संकेत मिल रहे हैं, जिससे असम और पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों के दौरान सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
बयान और सामरिक बदलाव
खुफिया एजेंसी के विश्लेषण के अनुसार, अब भारत अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियां ‘इंसीडेंट बेस्ड इंटेलिजेंस’ (घटना आधारित खुफिया जानकारी) के बजाय अब ‘पाइपलाइन इंटेलिजेंस’ पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
इसके तहत केवल व्यक्तिगत आतंकियों को पकड़ने के बजाय हथियारों, ड्रग्स और उनके हैंडलर्स की पूरी सप्लाई चेन को ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, ‘नेशन वाइड अर्ली वार्निंग आर्किटेक्चर’ तैयार किया जा रहा है जो सीमावर्ती इलाकों में गढ़े जा रहे ‘नैरेटिव वॉरफेयर’ और ‘डीप फेक’ जैसे खतरों का पहले ही पता लगा लेगा।
निष्कर्ष
वर्ष 2026 भारत के लिए एक ऐसा वर्ष होगा जहां सुरक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत घटनाओं पर प्रतिक्रिया कैसे देता है। खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा खतरों के इस जटिल जाल को सुलझाने के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण अपनाया है।
हालांकि पड़ोसी देशों की ओर से दबाव के बिंदु बनाए जा रहे हैं, लेकिन भारत की पूर्व-नियोजित रणनीतियों और प्रिवेंटिव इंटेलिजेंस के कारण इन खतरों को समय रहते नियंत्रित किए जाने की प्रबल संभावना है।
विशेषज्ञ का मत: “2026 में भारत की सुरक्षा इस बात पर तय होगी कि हम रिएक्ट कैसे करते हैं। दुश्मन अब वाइट-कॉलर इकोसिस्टम और नैरेटिव वॉर का सहारा ले रहे हैं, जिसके लिए भारत ने पहले ही प्रिवेंटिव स्ट्रैटेजी तैयार कर ली है।”
निष्कर्ष: वर्ष 2026 भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन 2025 की सीखों के आधार पर भारत ने एक सुपीरियर इंटेलिजेंस नेटवर्क तैयार किया है। दुश्मन देशों के ‘प्रेशर पॉइंट्स’ को विफल करने के लिए अब सारा दारोमदार सटीक एग्जीक्यूशन पर है।







